नौजवानों और नाबालिग ने मिलकर की सीतामढ़ी में सन्नी की हत्या।
– फोटो : अमर उजाला

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19 नवंबर को 5वीं का छात्र सन्नी गायब हुआ तो परिजनों ने सोशल मीडिया पर तस्वीर के साथ ढूंढ़ने की गुहार लगाई। थाने पहुंचकर नामजद आरोपियों पर अपहरण का आरोप लगाया। मगर, न सोशल मीडिया के जरिए मदद मिली और न पुलिस ने तेजी दिखाई। नतीजा, 11 साल का सन्नी मार डाला गया। सीतामढ़ी में सहीयारा थाना क्षेत्र के भीखा हरिकेश गांव में जब घर से कुछ ही दूर जंगल में सोमवार को सन्नी की लाश मिली तो कहानी सामने आई कि गोतिया के जमीन विवाद में यह हत्या हुई। लेकिन, कहानी इतनी ही नहीं। यह हर घर के लिए सीख है। दरअसल, अपहरण कर हत्या का मुख्य आरोपी अभी-अभी नाबालिग से बालिग हुआ है। उसने सबकुछ जान-समझ कर सन्नी को शिकार बनाया। टारगेट कोई और था, लेकिन उससे इस तरह बदला लेना आसान नहीं था, इसलिए मासूम सन्नी शिकार बना। अपहरण-हत्या के चार में से एक आरोपी नाबालिग भी है, जो कानून का फायदा उठाकर शायद फांसी तक नहीं पहुंचे, लेकिन अगर अब सामने आ रही यही वजह और साजिश सच्ची है तो कानून को भी सोचना होगा।

चोरी पकड़ने वाले को दुश्मन माना, छोटे भाई को मार डाला
अपहरण-हत्या की साजिश कुछ दिन पहले रची गई थी, शिकार के रूप में सन्नी का चुनाव बाद में हुआ। सन्नी के दादा का नाम कपिलदेव सिंह है। कपिलदेव सिंह के 5 बेटे- कृष्णनंदन, अरुण, उदय, विजय और विपिन। कृष्ण नंदन का बेटा किशन और शिवम है। उदय का उज्ज्वल और विपिन का सन्नी। दूसरी तरफ, कपिलदेव सिंह के भाई शत्रुघ्न सिंह के बेटे ललन व अनिल हैं। ललन का अभी-अभी बालिग हुआ बेटा निखिल मुख्य आरोपी है। एक और गोतिया अजय सिंह का इसी उम्र का बेटा विक्की भी आरोपी है। निखिल और विक्की का दोस्त राजा (बदला नाम) अभी नाबालिग ही है, जो पिछले दिनों नाबालिग लड़की भगा ले जाने के कारण चर्चा में था। प्राथमिकी में निखिल के पिता ललन सिंह का भी नाम है, क्योंकि एक और कहानी है। फिलहाल, साजिश की पहली और खास कहानी को समझिए। हत्या और लाश सामने आने के बाद नामजद आरोपियों में से ललन को छोड़ दोनों नौजवान और तीसरा नाबालिग पुलिस की गिरफ्त में हैं। पुलिसिया पूछताछ में सामने आया है कि निखिल ने पिछले दिनों किसी दुकान से नकदी चोरी की थी और किशन-उज्ज्वल ने इसका खुलासा कर दिया था। निखिल इन दोनों का मारना चाहता था, लेकिन उम्र और ताकत में यह दोनों इससे बीस पड़ते। इसके अलावा, जिस दिन हत्या की प्लानिंग थी, उस दिन उज्ज्वल आर्मी की दौड़ के लिए मुजफ्फरपुर चला गया था और किशन धान कटाई में चाचा के साथ था। इसलिए, इसी परिवार के छोटे भाई सन्नी को टारगेट किया गया। सन्नी को उसके अपने चाचा विजय के मठ से उठाया गया था और फिर कहीं हत्या कर जंगल में लाश छिपा दी गई। 21 नवंबर को जब लाश मिली तो उसकी आंखें फोड़ी हुई और नाखून उखाड़े हुए थे। मतलब, खुन्नस निकालते समय इन दोनों नौजवान और एक नाबालिग आरोपियों ने सारी हदें तोड़ दी थीं।

गोतिया का विवाद पहले से, इसमें भारी आरोपी पक्ष
कपिलदेव सिंह और शत्रुघ्न सिंह के बीच जमीन का विवाद काफी पहले से चला आ रहा है। दुश्मनी की बीज यहीं पड़ी। बताया जाता है कि शुगर मिल में कार्यरत रहे कपिलदेव सिंह के मकान के रास्ते की ओर शत्रुघ्न सिंह ने लैट्रिन बना दिया। कपिलदेव सिंह के पास दूसरा विकल्प था तो उन्होंने रास्ता दूसरी तरफ बना लिया। लेकिन, वर्षों पुरानी यह बात विवाद के रूप में आज भी जिंदा है। आरोपी निखिल शत्रुघ्न सिंह का पोता है। इस केस में शत्रुघ्न का बेटा ललन भी आरोपी है, क्योंकि सन्नी के परिजनों को इस विवाद के कारण भी अपहरण-हत्या की आशंका थी। ललन अबतक फरार है।

पुलिस के रवैए से मासूम के घर में कोहराम
सन्नी के अपहरण के साथ ही परिवार वालों ने जिन लोगों को नामजद करते हुए आरोप लगाया, वही हत्या के आरोपी भी हैं। केस में सहीयारा पुलिस ने तत्परता दिखाई होती तो शायद हत्या से पहले सन्नी बरामद हो सकता था। एसडीपीओ सुधीर कुमार के अनुसार, हत्या के दोनों एंगल पर पुलिस जांच कर रही है। एक पुरानी दुश्मनी और दूसरा ताजा घाव जैसा मामला है। एक आरोपी नाबालिग है। निखिल को अभी हम मुख्य आरोपी मानकर जांच कर रहे हैं, क्योंकि ज्यादा मजबूत एंगल यही है। बाकी पूरा अनुसंधान हो जाए तो सारी बातें साफ हो जाएंगी। जिस वीभत्स तीरके से हत्या को अंजाम दिया गया है, अपराधी किसी हालत में नहीं बचेंगे।

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19 नवंबर को 5वीं का छात्र सन्नी गायब हुआ तो परिजनों ने सोशल मीडिया पर तस्वीर के साथ ढूंढ़ने की गुहार लगाई। थाने पहुंचकर नामजद आरोपियों पर अपहरण का आरोप लगाया। मगर, न सोशल मीडिया के जरिए मदद मिली और न पुलिस ने तेजी दिखाई। नतीजा, 11 साल का सन्नी मार डाला गया। सीतामढ़ी में सहीयारा थाना क्षेत्र के भीखा हरिकेश गांव में जब घर से कुछ ही दूर जंगल में सोमवार को सन्नी की लाश मिली तो कहानी सामने आई कि गोतिया के जमीन विवाद में यह हत्या हुई। लेकिन, कहानी इतनी ही नहीं। यह हर घर के लिए सीख है। दरअसल, अपहरण कर हत्या का मुख्य आरोपी अभी-अभी नाबालिग से बालिग हुआ है। उसने सबकुछ जान-समझ कर सन्नी को शिकार बनाया। टारगेट कोई और था, लेकिन उससे इस तरह बदला लेना आसान नहीं था, इसलिए मासूम सन्नी शिकार बना। अपहरण-हत्या के चार में से एक आरोपी नाबालिग भी है, जो कानून का फायदा उठाकर शायद फांसी तक नहीं पहुंचे, लेकिन अगर अब सामने आ रही यही वजह और साजिश सच्ची है तो कानून को भी सोचना होगा।

चोरी पकड़ने वाले को दुश्मन माना, छोटे भाई को मार डाला

अपहरण-हत्या की साजिश कुछ दिन पहले रची गई थी, शिकार के रूप में सन्नी का चुनाव बाद में हुआ। सन्नी के दादा का नाम कपिलदेव सिंह है। कपिलदेव सिंह के 5 बेटे- कृष्णनंदन, अरुण, उदय, विजय और विपिन। कृष्ण नंदन का बेटा किशन और शिवम है। उदय का उज्ज्वल और विपिन का सन्नी। दूसरी तरफ, कपिलदेव सिंह के भाई शत्रुघ्न सिंह के बेटे ललन व अनिल हैं। ललन का अभी-अभी बालिग हुआ बेटा निखिल मुख्य आरोपी है। एक और गोतिया अजय सिंह का इसी उम्र का बेटा विक्की भी आरोपी है। निखिल और विक्की का दोस्त राजा (बदला नाम) अभी नाबालिग ही है, जो पिछले दिनों नाबालिग लड़की भगा ले जाने के कारण चर्चा में था। प्राथमिकी में निखिल के पिता ललन सिंह का भी नाम है, क्योंकि एक और कहानी है। फिलहाल, साजिश की पहली और खास कहानी को समझिए। हत्या और लाश सामने आने के बाद नामजद आरोपियों में से ललन को छोड़ दोनों नौजवान और तीसरा नाबालिग पुलिस की गिरफ्त में हैं। पुलिसिया पूछताछ में सामने आया है कि निखिल ने पिछले दिनों किसी दुकान से नकदी चोरी की थी और किशन-उज्ज्वल ने इसका खुलासा कर दिया था। निखिल इन दोनों का मारना चाहता था, लेकिन उम्र और ताकत में यह दोनों इससे बीस पड़ते। इसके अलावा, जिस दिन हत्या की प्लानिंग थी, उस दिन उज्ज्वल आर्मी की दौड़ के लिए मुजफ्फरपुर चला गया था और किशन धान कटाई में चाचा के साथ था। इसलिए, इसी परिवार के छोटे भाई सन्नी को टारगेट किया गया। सन्नी को उसके अपने चाचा विजय के मठ से उठाया गया था और फिर कहीं हत्या कर जंगल में लाश छिपा दी गई। 21 नवंबर को जब लाश मिली तो उसकी आंखें फोड़ी हुई और नाखून उखाड़े हुए थे। मतलब, खुन्नस निकालते समय इन दोनों नौजवान और एक नाबालिग आरोपियों ने सारी हदें तोड़ दी थीं।

गोतिया का विवाद पहले से, इसमें भारी आरोपी पक्ष

कपिलदेव सिंह और शत्रुघ्न सिंह के बीच जमीन का विवाद काफी पहले से चला आ रहा है। दुश्मनी की बीज यहीं पड़ी। बताया जाता है कि शुगर मिल में कार्यरत रहे कपिलदेव सिंह के मकान के रास्ते की ओर शत्रुघ्न सिंह ने लैट्रिन बना दिया। कपिलदेव सिंह के पास दूसरा विकल्प था तो उन्होंने रास्ता दूसरी तरफ बना लिया। लेकिन, वर्षों पुरानी यह बात विवाद के रूप में आज भी जिंदा है। आरोपी निखिल शत्रुघ्न सिंह का पोता है। इस केस में शत्रुघ्न का बेटा ललन भी आरोपी है, क्योंकि सन्नी के परिजनों को इस विवाद के कारण भी अपहरण-हत्या की आशंका थी। ललन अबतक फरार है।

पुलिस के रवैए से मासूम के घर में कोहराम

सन्नी के अपहरण के साथ ही परिवार वालों ने जिन लोगों को नामजद करते हुए आरोप लगाया, वही हत्या के आरोपी भी हैं। केस में सहीयारा पुलिस ने तत्परता दिखाई होती तो शायद हत्या से पहले सन्नी बरामद हो सकता था। एसडीपीओ सुधीर कुमार के अनुसार, हत्या के दोनों एंगल पर पुलिस जांच कर रही है। एक पुरानी दुश्मनी और दूसरा ताजा घाव जैसा मामला है। एक आरोपी नाबालिग है। निखिल को अभी हम मुख्य आरोपी मानकर जांच कर रहे हैं, क्योंकि ज्यादा मजबूत एंगल यही है। बाकी पूरा अनुसंधान हो जाए तो सारी बातें साफ हो जाएंगी। जिस वीभत्स तीरके से हत्या को अंजाम दिया गया है, अपराधी किसी हालत में नहीं बचेंगे।



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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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