खगड़िया43 मिनट पहले

भारत माता के साथ दुर्गा माता की प्रतिमा भी है स्थापित

देश का संविधान लागू होने के बाद 26 जनवरी 1950 को एक तरफ जहां भारत अपना पहला गणतंत्र दिवस समारोह मना रहा था। वहीं दूसरी तरफ बिहार के मुंगेर जिले का फरकिया क्षेत्र, जो अब खगड़िया जिले के नाम से जाना जाता है, वहां जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित सुदूर देहात पिपरपांती गांव में तब के स्वाधीनता संग्राम में योगदान देने वाले और देश की आजादी के दीवानों ने भारत माता की पूजा अर्चना की थी। पूरे गांव के लोगों ने इस उत्सव को मिलकर मनाया था और मेला लगाया गया था। उस मेला का नाम पड़ा ‘भारत माता मेला’। जो अब भी प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित हो रहा है।

26 और 27 जनवरी को लगता है मेला

पूरे बिहार में नहीं है ऐसा कोई गांव

खगड़िया ही नहीं पूरे बिहार का यह इकलौता ऐसा गांव है, जहां मंदिर-मस्जिद से ज्यादा गणतंत्र दिवस पर भारत माता मंदिर में पूजा अर्चना करने वालों की भीड़ जुटती है। पिपरपांती गांव के सरकारी स्कूल के समीप बने भारत माता मंदिर में गणतंत्र दिवस पर बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं पुरुषों की भीड़ जुटती है, जो मां भारती की श्रद्धापूर्वक पूजन कर गणतंत्र देश का उत्सव मनाते हैं। पूरा गांव ही नहीं आसपास के कई गांवों के लोग भी इस अनोखे कार्यक्रम में सरीक होकर भारत माता की मंदिर में पूजा अर्चना कर मेले का लुफ्त उठाया करते हैं।

36 गांव के मुखिया थे स्व. दीपनारायण सिंह

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि आजादी से पहले इसी गांव के स्व. दीपनारायण सिंह आसपास के 36 गांव के मुखिया हुआ करते थे। देश की आजादी में इलाके के लोगों का भी काफी सहयोग रहा, जिसमें स्व. दीपनारायण सिंह का महत्वपूर्ण योगदान था। देश की आजादी के बाद जब 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ और दिल्ली के इरविन स्टेडियम (अब दिल्ली का चिड़ियाघर) में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद आजाद भारत का पहला गणतंत्र दिवस मनाया था तो उसी दिन खगड़िया जिले के गोगरी प्रखंड के पिपरपांती गांव में स्व. दीपनारायण सिंह के भाई कमलाकांत सिंह, पुत्र स्व सुधीर सिंह के अलावा अनुपलाल सिंह, कमलेश्वरी सिंह, श्यामानंद सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने पिपरपांती गांव में भारत माता की पूजा अर्चना कर झंडोत्तोलन किया था।

पूजा-अर्चना के बाद होता है झंडोत्तोलन कार्यक्रम

पूजा-अर्चना के बाद होता है झंडोत्तोलन कार्यक्रम

वर्ष 1950 के बाद भारत माता की प्रतिमा स्थापित कर यहां मंदिर बनवाया गया। आज भी इस मंदिर में भारत माता की स्थाई प्रतिमा स्थापित है और यहां ग्रामीणों के द्वारा पूजा अर्चना की जाती है। उक्त मंदिर में भारत माता के साथ दुर्गा माता की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।

पहले पूजा फिर झंडोत्तोलन

पिपरपांती गांव में गणतंत्र दिवस के मौके पर सुबह 7 बजे से भारत माता मंदिर में पूजा अर्चना का दौर शुरू हो जाता है। सार्वजनिक रूप से भारत माता की पूजा-अर्चना के बाद मैदान में सार्वजनिक झंडोत्तोलन कार्यक्रम होता है। इसके बाद विभिन्न प्रतियोगिता, नाट्य मंचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है। इस दो दिवसीय मेले में सिर्फ देशभक्ति गीत ही बजाए जाते हैं। प्रत्येक वर्ष 26 और 27 जनवरी को पूरा गांव मेले में सरीक होकर देश की आजादी का उत्सव मनाते हैं। इस बार भी मेले को लेकर भव्य तोरणद्वार बनाए गए हैं।

अब तक नहीं मिल पाई पहचान

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गणतंत्र दिवस का मेला खगड़िया जिला ही नहीं पूरे बिहार का इकलौता मेला है। फरकिया क्षेत्र के सुदूर देहात होने के कारण इस मेला की कोई विशेष पहचान नहीं मिल पाई है। ग्रामीणों के सहयोग से ही मेला लगता है। इस एतिहासिक मेले को पहचान मिले तो इसका और भी विस्तार किया जा सकता है। सुविधा के अभाव में मेला छोटे स्तर पर ही सीमित है।

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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