नालंदा25 मिनट पहले

बिहारशरीफ प्रखंड में चल रहा गौरैया संरक्षण।

बिहार की राजकीय पक्षी गौरैया विलुप्त होने के कगार पर आ गई है। गौरैया पक्षी अपना अस्तित्व खो रही है। तो वही गौरैया पक्षी को लेकर एक सुखद खबर भी है कि इसके संरक्षण को लेकर पर्यावरण-विद ने जिम्मा उठाया है। दरअसल, बिहारशरीफ प्रखंड के सुदूर इलाके में बसा एक गांव तेतरवां है। जहां वर्ष 2010 से संरक्षण का कार्य किया जा रहा है।

गौरैया विहग फॉउंडेशन के संस्थापक राजीव रंजन पांडे इसे लेकर काफी संजीदगी से इस कार्य में लगे हुए है। गांव भर में पंछी को रहने के लिए घोंसला बनवा कर घरों में टंगवा चुके हैं। साथ ही साथ उसके भोजन पानी का भी नियमित ख्याल रख रहें हैं।

राजीव बताते है कि 2010 के करीब उनके घर के आसपास महज़ 8-10 गौरैया की आबादी थी। तब गांव वालों को इसके प्रति जागरूक और इसके पर्यावरणीय महत्व को बताना शुरू किया। गांव वालों के सहयोग से पक्षियों के लिए वक्त पर दाना-पानी की व्यवस्था की। इसके कारण गौरैया की आबादी में वृद्धि होने लगी। वर्ष 2020 तक इसकी संख्या 700 के पार कर गई और पूरे गांव में 1,500 के पार कर गई। तब से इसको एक अभियान का रूप देकर आम जनों को जोड़ा।

टावरों से निकलते रेडिएशन के कारण गौरैया की संख्या में कमी आई है।

राज्य और देश विदेश में चल रहा है गौरैया संरक्षण का कार्य

वर्तमान में बिहार के 24 जिले,12 राज्य और नेपाल व श्रीलंका से लोग जुड़कर संरक्षण के कार्य में लग गए। इन 10 वर्षों में गौरैया के अलावा कौवा, मैना,सनबर्ड,चुहचुही,उल्लू, गोल्डेन,पिलख,कोयल,महालता,बाज जैसे अनेक पक्षियों को संरक्षण मिलने लगा और आबादी में वृद्धि होने लगी। इससे पूरी खाद्य श्रृंखला का विकास हुआ।

2020 के आंकड़ों के अनुसार, गौरैया की संख्या पूरे गांव में 1500 के पार कर गई।

2020 के आंकड़ों के अनुसार, गौरैया की संख्या पूरे गांव में 1500 के पार कर गई।

गौरैया विहग फाउंडेशन चलाते हैं राजीव

राजीव ने अब अपना एक संस्था बनाया है जिसका नाम गौरैया विहग फाउंडेशन है। राजीव आगे बताते है कि गौरैया पर्यावरण शुद्धता का सूचक है। मानव के साथ इसका जुड़ाव करीब 10 हज़ार वर्षों से है। लेकिन लक्ष्य विहीन विकास के कारण दुनियां भर में इसकी आबादी में 60 से 80 फीसदी तक गिरावट आ गई है। इसके लिए सरकारी और सामाजिक स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। इस दिशा में उनकी संस्था देशभर में सकारात्मक कार्य रही है।

क्या कारण है पंक्षियों की आबादी घटने की

  • खेतों में रसायन व कीटनाशक का प्रयोग
  • टावरों से निकलता रेडिएशन
  • प्राकृतिक आवास में आए दिन कमी
  • भोजन-पानी की कमी
  • इंसानों द्वारा शिकार
  • जलवायु परिवर्तन
  • लोगों में जागरूकता की कमी

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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