पटनाएक घंटा पहलेलेखक: शंभू नाथ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को बिहार पहुंचे। यहां सीमांचल में पूर्णिया के रंगभूमि मैदान में जब भाषण दे रहे थे तब उनसे ज्यादा मोदी-मोदी के नारे लग रहे थे। इन्हीं नारों को 2024 तक बुलंद करने के उद्देश्य से अमित शाह यहां पहुंचे थे। इस रंगभूमि मैदान से शाह ने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए रणभेरी भी बजा दी।

यहां अमित शाह ने कहा-

‘2024 में बिहार की जनता लालू-नीतीश की जोड़ी का सूपड़ा साफ कर देगी। सीमांचल के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। यहां नरेंद्र मोदी की सरकार है। नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनने के लिए RJD और कांग्रेस की गोद में जाकर बैठ गए हैं। कभी प्रधानमंत्री बन पाएंग क्या? नीतीश बाबू चारा घोटाला करने वाले आपकी सरकार में मंत्री और षड्यंत्र करने वाले साझीदार बन गए हैं।’

अमित शाह ने अपने 31 मिनट के भाषण में 22 बार नीतीश-लालू का नाम लिया। 10 बार से ज्यादा जंगलराज का याद दिलाए। उम्मीद से उलट उन्होंने एक बार भी मुस्लिम शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और न ही उन्होंने तेजस्वी का जिक्र किया।

चुनाव अभी 20 महीने दूर है। ऐसे में बिहार, बंगाल और बांग्लादेश के बॉर्डर से अमित शाह का ये अभियान कई लोगों के जेहन में कई सवाल पैदा कर दिए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई नीतीश मोदी का समीकरण बिगाड़ रहे हैं? क्या नीतीश कुमार मोदी के मिशन 2024 में बड़े विरोधी के रूप में उभर रहे हैं?

शाह को पता है कि बिहार में ध्रुवीकरण के लिए सीमांचल सबसे मुफीद है।

मुस्लिम, यादव, कुर्मी का नया फॉर्मूला तैयार कर रहे नीतीश

इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन कहते हैं कि विरोधी खेमें को नीतीश कुमार मिल जाने से एक प्राणवायु मिली है। नीतीश कुमार से पहले केसीआर, प्रशांत किशोर, केजरीवाल सभी एकजुट करने की कोशिश में जुटे हुए थे, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। नीतीश के आ जाने के बाद अब एकजुटता बनते दिखाई दे रही है। साथ ही मोहन कहते हैं देश स्तर पर एक नया समीकरण तैयार किया गया है। मुस्लिम-यादव और कुर्मी का। ये समीकरण अगर आकार ले लेता है तो अगले चुनाव में 150 सीटों पर बीजेपी यानी मोदी की परेशानी बढ़ सकती है।

सेक्युलरिज्म का जवाब उन्हीं के स्टाइल में देने की कोशिश

बिहार के सीमांचल से प्रचार अभियान शुरू करने के सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार कहते हैं नीतीश कुमार एंड ऑल का सेक्युलरिज्म का मतलब होता है कि मुस्लिम वोटों का कंसोलिडेशन उनके पक्ष में हो और साथ ही साथ जो व्यक्ति बीजेपी विरोधी है वो भी उनके पक्ष में आ जाए।

सीमांचल में हिंदू वोटों को अपने पक्ष में कर सेक्यूलरिज्म का जवाब उन्हीं के स्टाइल में देने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दो चुनाव से लगातार बीजेपी को हिंदू वोटों का समर्थन मिला है। नीतीश के पाला बदलने से पहले एनडीए के यहां तीन सांसद थे। जाहिर सी बात नीतीश कुमार अपने दम पर यहां दो सीट नहीं जीत पाए थे। इसके माध्यम से बीजेपी अपनी शक्ति भी दिखाना चाहती है।

बिहार में ध्रुवीकरण के लिए सीमांचल सबसे मुफीद

अरविंद मोहन कहते हैं कि बिहार में ध्रुवीकरण के लिए सीमांचल सबसे मुफीद इलाका है। सीमांचल में जब चुनाव आता है तो बीजेपी पोलराइज करने में सफल रहती है। इसका असर पूरे नॉर्थ बिहार तक दिखता है। इसी का नतीजा है कि सीमांचल के बहाने पूरे हिन्दी पट्‌टी मे ध्रुवीकरण करने में बीजेपी सफल रही है। शाह एक बार फिर से इसी को रिपीट करना चाहते हैं।

शाह जिस स्टाइल की राजनीति के लिए जाे जाते हैं उसमें सीमांचल पूरी तरह फिट है।

शाह जिस स्टाइल की राजनीति के लिए जाे जाते हैं उसमें सीमांचल पूरी तरह फिट है।

लालू डरे नहीं, नीतीश को कुछ कर नहीं सकते

अमित शाह अपनी रैली में नीतीश कुमार और लालू यादव पर जमकर बोला है। उन्हें पता है कि जंगलराज का डर अभी भी बिहार के इस इलाके में बना हुआ है। नीतीश कुमार पर हमला बोलने का विकल्प नहीं है इसलिए उन्हें वे अब धोखेबाज साबित करना चाहते हैं। अरविंद मोहन कहते हैं कि लालू डर नहीं रहे और नीतीश को डराने का उनके पास विकल्प नहीं। मात्र यही एक ऑप्शन उनके पास बचता है।

तेजस्वी पर कुछ नहीं बोलने की तैयार हो रही रणनीति

बिहार में अभी मोदी सरकार पर जो नेता सबसे ज्यादा मुखर हैं वो हैं डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव। अमित शाह अपने भाषण में एक बार भी उनका जिक्र नहीं किए। इसका सबसे बड़ा कारण युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता को माना जा रहा है। इसके साथ ही जिस तरह बीजेपी के अगड़ा वोट बैंक में उन्होंने सेंधमारी की है। इससे भी पार्टी पूरी तरह सतर्क है। अवधेश कुमार कहते हैं कि अभी तक तेजस्वी के ऊपर कोई बड़ा आरोप भी साबित नहीं हो सका है। इस लिहाज से भी बीजेपी सतर्क है।

पूर्णिया में अमित शाह के निशाने पर रहे लालू-नीतीश:गृहमंत्री बोले-नीतीश प्रधानमंत्री बनने के लिए RJD- कांग्रेस की गोद में बैठ गए

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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