पटना5 घंटे पहलेलेखक: आलोक द्विवेदी

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कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत मिलने वाले पैसे में देरी की वजह से कई लोगों को मौत के बाद कफन भी मशक्कत से नसीब हुआ ।

कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत मिलने वाले पैसे में देरी की वजह से कई लोगों को मौत के बाद कफन भी मशक्कत से नसीब हुआ। किसी बेटे ने मां के अंतिम संस्कार के लिए पत्नी के पायल बेचे, तो किसी ने अपने बच्चों की पढ़ाई बंद करवा दी। लोगों की परेशानी को देखते हुए अब समाज कल्याण विभाग कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत पैसे देने के लिए नियमों में बदलाव कर रहा है। मौत के बाद यदि उनके परिजन आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर देंगे, तो उन्हें दो से पांच घंटे में योजना के तहत तीन हजार रुपए दिए जाएंगे।

इसके साथ ही हर दिन आवेदकों के फॉर्म का वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों के खाते में 10 से 30 आवेदकों के लिए 30 से 90 हजार रुपए तक एडवांस पैसा जमा किया जाएगा। इससे पहले महीने में तीन दिन फॉर्म का वेरिफिकेशन होता था। उसके बाद आवेदकों को पैसे दिए जाते थे। अधिकांश समय जिम्मेदार अधिकारियों के पास पैसे नहीं रहने की वजह से कबीर अंत्येष्टि के तहत लोगों को पांच से 14 महीने के बाद पैसे मिलते थे।

इससे कई लोगों को कर्ज लेकर अपने परिजन का अंतिम संस्कार करना पड़ता था। कबीर अंत्येष्टि के तहत चार वर्षों में लगभग 75 हजार लोगों को योजना के तहत लाभ दिया गया है। इसके तहत लाभार्थी को 22.50 करोड़ रुपए दिए गए हैं।

समिति के आधार पर होगा अनुमोदन, हर दिन होगी फॉर्म की जांच
कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत पहले कार्यपालक पदाधिकारी ही आवेदकों को पैसे देते थे। इसकी वजह से काफी वक्त लगता था। फॉर्म की जांच भी प्रत्येक महीने में 10, 20 और 30 तारिख को होती थी। अब नए नियमों के मुताबिक हर दिन आवेदकों के फॉर्म का वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसके साथ ही समिति द्वारा पैसा रिलीज किया जाएगा। अब कबीर अंत्येष्टि के तहत अधिकारियों के खाते में 30 से 90 हजार रुपए तक एडवांस जमा रहेगा। इस दौरान नगर निगम को 30 लोगों के भुगतान के लिए 90 हजार, परिषद को 20 लोगों के लिए 60 हजार रुपए एडवांस रहेगा।

केस-1 } मां के कफन के लिए पत्नी का पायल तक बेचना पड़ा
राजेंद्र नगर निवासी राकेश कुमार ने मां की मौत पर पत्नी के पायल को पहले गिरवी रखा और बाद में कर्ज ना चुकाने पर बेचना पड़ा। राकेश कुमार का कहना है कि उसकी मां की मौत 2021 जून में हुई थी। कबीर अंत्येष्टि के तहत पैसे के लिए आवेदन किया। लेकिन, नहीं मिला। एक दुकानदार को 35 सौ रुपए के बदल पायल गिरवी रख दिया। एक साल खत्म होने के बाद पैसे नहीं चुका पाया, तो मजबूरी में बेच कर कर्जा चुकाना पड़ा।

केस-2 } निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अब गांव में पढ़ रहेच कर कर्ज चुकता किया।

“कबीर अंत्येष्टि के तहत लोगों को मिलने वाले पैसे में काफी देरी होती थी। इससे गरीब को योजना का सही लाभ नहीं मिल रहा था। इसको देखते हुए योजना के कार्य के तरीके में बदलाव किया गया। समिति के माध्यम से हर दिन लोगों को पैसे दिए जाएंगे। साथ ही अधिकारियों को एडवांस दिया गया है। जिससे लोगों की समस्या तुरंत खत्म हो जाए।” -मदन सहनी, मंत्री, समाज कल्याण विभाग

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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