पटना2 घंटे पहलेलेखक: शंभू नाथ

डेट- 8 मई 2012

‘लालू लफंदर हैं… उनका दिमाग ठिकाने पर नहीं हैं….। ’1989 से लेकर 2009 तक लालू सत्ता का उपभोग करते रहे। लेकिन पिछले दो-ढाई सालों से न तो उनके पास बिहार की ही सत्ता है और न ही केंद्र की सत्ता में हिस्सेदारी। इस कुंठा के चलते उनका भेजा घूम गया है। बिहार की जनता ने लालू यादव और उनके कुनबे को बिहार से तड़ीपार कर दिया है।’

यह बात शिवसेना के तत्कालीन सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे ने अपने अखबार सामना में लिखी थी, जब मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाने पर लालू यादव ने कटाक्ष किया था।

डेट- 23 नवंबर 2022
अब बाला साहेब ठाकरे के पोते और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे बुधवार को पटना पहुंचे। एयरपोर्ट से वे सीधे राबड़ी आवास पहुंचे। यहां बिहार के डिप्टी सीएम और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने इनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों के बीच दो घंटे से ज्यादा देर तक मुलाकात चली।

एक दशक बाद यह बदलाव नरेंद्र मोदी को लेकर ही है। 2012 में भाजपा और शिवसेना साथ थे। मोदी और बाला साहेब ठाकरे में खूब बनती थी। अब राहें जुदा हो गई हैं। इसलिए तस्वीर भी बदल गई है। आइए जानें ठाकरे परिवार… लालू परिवार की मजबूरी को..

पहले इस बयान को पढ़िए… जिसमें बिहार को लेकर ठाकरे परिवार की मानसिकता दिखती है.. बाला साहेब ठाकरे ने 2008 में शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा- एक बिहारी सौ बीमारी। अखबार ने लिखा कि बिहार में भ्रष्टाचार की गंगा बहती है और इसी वजह से ही गंगा मैली हो गई है। वहां गरीबी, भूख, बेरोजगारी और जातिवाद के साथ अराजक स्थिति है।

बाल ठाकरे की राजनीति के मुखर विरोधी थे लालू यादव।

अब इसके अलग-अलग मायने समझिए

तब नरेंद्र मोदी के समर्थन में बिहारी को बीमारी बताए थे ठाकरे

तब लालू यादव ने नीतीश कुमार और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी के मुलाकात का विरोध किया था। तब दोनों की हाथ मिलाती एक तस्वीर सामने आई थी। इस पर लालू यादव ने कहा था कि बिहार के मुख्यमंत्री का असली ‘चेहरा’ सामने आ गया है। लालू यादव के इसी बयान के बाद बाल ठाकरे भड़क गए थे।

अब नरेंद्र मोदी के विरोध में बिहार आए हैं आदित्य ठाकरे

दरअसल बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव देश भर में भाजपा का विरोध करनेवाले दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। वे हर राज्य की प्रमुख पार्टियों के नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं। इसकी अगुआई खुद सीएम नीतीश कुमार कर रहे हैं। तेजस्वी यादव और आदित्य ठाकरे की इस मुलाकात को भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

बिहारी को भइया कहने पर शिवसैनिकों को दंगे का आरोपी बोले थे लालू

वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार कहते हैं कि बाल ठाकरे के दौर में बिहार के लोगों को ‘भईया’ कहकर पुकारा जाने लगा था। बिहार के लोगों को निशाना बनाने और उन्‍हें मुंबई से खदेड़ने की बात करने वाले ठाकरे परिवार के विरोध में राजद सुप्रीमो लालू यादव ने मोर्चा संभाला था। मुंहतोड़ जवाब दिया था। ‘भइया’ कह कर अपमानित किए जाने के खिलाफ लालू यादव ने स्टैंड लिया था।अवधेश कुमार कहते हैं कि लालू यादव ने यहां तक कह दिया था कि 1993 में जो दंगे हुए थे वो बाल ठाकरे व शिवसैनिकों ने कराया था।

लालू यादव ने शिवसेना को भाजपा से भी ज्यादा खतरनाक बताया था।

लालू यादव ने शिवसेना को भाजपा से भी ज्यादा खतरनाक बताया था।

क्या केवल भाजपा विरोध की नीति पर चल पड़े हैं तेजस्वी

अवधेश कुमार कहते हैं कि तेजस्वी यादव केवल भाजपा विरोध की नीति पर चल पड़े हैं।आदित्य ठाकरे का बिहार आना और तेजस्वी यादव के साथ उनकी मुलाकात, इसी बात का संकेत दे रही है। खास कर राजद की राजनीतिक सोच में कितना अंतर आ गया है। जिस शिवसेना को लालू यादव ने भाजपा से भी खतरनाक बताया था, उसी के शीर्ष नेता की अगवानी तेजस्वी कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें बताना चाहिए कि क्या शिवसेना के प्रति उनका और राजद का विचार बदल गया है?

बिहारी अस्मिता को किनारे कर मोर्चाबंदी करने में लगे हुए हैं

वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि सिद्धांत विहीन राजनीति के यही लक्षण हैं। ये अस्मिता को किनारे कर बस मोर्चाबंदी करने में लगे हुए हैं। जनता की चिंता की जगह बस ये अपने स्वार्थ पूरा करने में जुटे हैं। इन्हें पता है कि बिहार के लोगों में ये राजनीतिक चेतना अभी नहीं आई है कि उनके नेता ने रुख बदला है तो उनका विरोध करें।

अगर बिहार के लोग इसे इश्यू बना लें कि ये मुलाकात सही नहीं है तब तो ये ऐसा सोचेंगे भी नहीं। लेकिन ये जानते हैं कि ये किधर भी जाएं इनका आधार वोट इनके साथ है, इसलिए इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है।

इस मुलाकात से शिवसेना या राजद को क्या लाभ होगा?

इस सवाल के जवाब में मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि फिलहाल दोनों को कोई लाभ होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। न तो राजद को और न ही शिवसेना को। अगर आदित्य ठाकरे ऐसा सोच रहे हैं कि तेजस्वी के साथ आने से मुंबई के चुनाव में उन्हें लाभ मिलेगा तो ऐसा होता हुआ भी दिखाई नहीं दे रहा है।

अवधेश कुमार कहते हैं कि गठबंधन के बाद तेजस्वी की विश्वसनीयता और साख दोनों को नुकसान होगा। वे कहते हैं कि बिहार में जो लोग शिवसैनिकों के हाथों अपमानित हुए उन्हें क्या जवाब देंगे।

आदित्य ठाकरे एयरपोर्ट से सीधे राबड़ी आवास पहुंचे।

आदित्य ठाकरे एयरपोर्ट से सीधे राबड़ी आवास पहुंचे।

भाजपा ने कहा – सत्ता के लिए लालू की राजनीति के खिलाफ जा रहे हैं तेजस्वी

वहीं इस मुलाकात के बाद भाजपा ने तेजस्वी पर हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि तेजस्वी यादव सत्ता के लिए अपने पिता की राजनीति से विपरित राजनीति कर रहे हैं। जिस शिवसेना की राजनीति को लालू यादव ने नकार दिया था, तेजस्वी उनका स्वागत कर रहे हैं। महामंत्री दे‌वेश कुमार ने कहा कि दोनों पार्टियों का अपने राज्य से बाहर कोई वजूद नहीं हैं। मिलना उनका अधिकार है, जिनसे चाहें मिलते रहें।

बिहारियों का सपोर्ट करने पर सचिन को भी नहीं बख्शे थे ठाकरे

उत्तर भारतीयों का समर्थन करने पर बाल ठाकरे ने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को भी नहीं बख्शा था। मुंबई भारतीयों का है, सचिन के ये कहने पर बाल ठाकरे ने कहा था कि वो राजनीति के मामले में बयानबाजी न करें। बाल ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में सचिन के नाम खुला खत लिखकर कहा था कि सचिन क्रिकेट ही खलें और राजनीति की पिच पर बल्लेबाजी की कोशिश ना करें। उन्होंने लिखा था कि क्रिकेट की पिच पर तूने जो कमाया उसे राजनीति की पिच पर मत गंवा।

जब लालू ने कहा था – राज ठाकरे को बिहार भेजिए, अनुशासित कर भेजेंगे

बाल ठाकरे के भतीजे और महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे महारष्ट्र से बिहारियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे रहे थे, तब लालू ने महाराष्ट्र सरकार से उन्हें गिरफ्तार कर बिहार भेजने के लिए कहा था। लालू यादव ने कहा था कि राज ठाकरे को गिरफ्तार कर सरकार बिहार की जेल में भेजे।उनको अनुशासित कर वापस महाराष्ट्र भेज दिया जाएगा। फिर राज कभी इस तरह की हरकत नहीं करेंगे।

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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