पटना2 घंटे पहलेलेखक: अमनेश दुबे

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वर्ष 2016 में बने पटना मास्टर प्लान-2031 में बदलाव हाेगा। नगर आवास विभाग द्वारा राजधानी पटना में बेतरतीब विकास को रोकने के लिए मास्टर प्लान को रिवाइज किया जाएगा। नया मास्टर प्लान वर्ष 2041 काे ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इसका कारण यह है कि अभी मुख्य सड़क के दोनों ओर ही आवासीय और कॉमर्शियल विस्तार पर जोर है, जिसके चलते योजनाबद्ध तरीके से पटना का विकास नहीं हो रहा है। अब इसपर रोक लगेगी।

शहर के दक्षिणी क्षेत्र बाइपास के इलाके में सघन बसाहट के चलते वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर की नई परियोजनाओं को लागू करने में दिक्कत हो रही है। इसी तरह रूपसपुर नहर रोड, गोला रोड, आरपीएस से लेकर दानापुर-खगौल रोड में भी मनमाने निर्माण प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। मास्टर प्लान सख्ती से लागू नहीं हाेने के चलते बड़े इलाके में लाखों मकान बिना नक्शा के बन चुके हैं। लोगों ने पईन पर रास्ता बना लिया है। कई ऐसे माेहल्ले बस गए हैं, जहां चारपहिया जाना संभव नहीं है। यही स्थिति व्यावसायिक मार्केट की है। लोग अपने मर्जी से दुकानें बनाकर मार्केट का रूप दे चुके हैं।

पहला मास्टर प्लान वर्ष 1962 में बना
पटना शहर की आबादी बढ़ने के बाद विस्तार के लिए के लिए पहला मास्टर प्लान वर्ष 1962 से 1981 तक के लिए बना था। तीसरा मास्टर प्लान वर्ष 2016 से 2031 तक के लिए बना है। अब इसमें संशाेधन किया जा रहा है।
मास्टर प्लान में 21 प्रखंड शामिल : पटना मास्टर प्लान के क्षेत्रफल में मनेर, दानापुर-खगौल, पटना ग्रामीण, संपतचक, फुलवारी, बिहटा, नौबतपुर, मसौढ़ी, धनरूआ, पुनपुन, फतुहा, दनियावां, खुसरूपुर, बख्तियारपुर, अथमलगोला प्रखंड शामिल हैं। वहीं, सारण जिले के दीघवारा, दरियापुर, सोनपुर और वैशाली के हाजीपुर, राघोपुर और बिदुपुर भी शामिल हैं। इनमें कुछ का हिस्सा ही शामिल हुआ है।

महानगर क्षेत्र प्राधिकार शुरू करेगा काम
कुछ माह पहले ही पटना महानगर क्षेत्र प्राधिकार का अध्यक्ष राज्य सरकार के सचिव या उससे ऊपर स्तर के अधिकारी काे बनाने की मंजूरी मिली है। इससे उम्मीद बढ़ी है कि पटना के आसपास के इलाके में होने वाले बेतरतीब विकास पर रोक लगेगी। प्राधिकार राज्य सरकार के दिशा-निर्देश पर कई योजनाओं पर काम शुरू करेगा। इसमें मुख्य तौर से विकास योजना बनाना, सर्वेक्षण करना, विकास गतिविधियों को नियमानुसार नियंत्रित करना, आधारभूत संरचनाओं जलापूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज आदि का निर्माण शामिल है।

कहते हैं एक्सपर्ट- प्रो. संजीव सिन्हा, डीन एकेडमिक, एनआईटी
पटना का मास्टर प्लान 2016 में बना था। यह स्वागतयोग्य कदम था। लेकिन, छह साल तक सख्ती से लागू नहीं होने से पटना का रिबन डेवलपमेंट हो रहा है। यानी, नई सड़क के दोनों किनारे। इसके बाद वाले इलाके में स्थिति बेहद खराब है। सरकार यदि फिर से मास्टर प्लान को लागू करती है तो समग्र विकास होगा। यानी जमीन का अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से बेहतर उपयोग हो सकेगा।

पटना शहर में प्लानिंग वाली कॉलोनी महज चार हैं। इनमें पाटलिपुत्र, कंकड़बाग, बहादुरपुर और राजेंद्रनगर है। वर्तमान में बसने वाली कॉलोनियों में 20 फीट या उससे कम चौड़ी सड़कें हैं। चौड़ी सड़कें, अस्पताल, स्कूल, लोकल मार्केट, वाटर बॉडीज, पार्क, मैदान, मनोरंजन, हरित क्षेत्र नहीं है। इस विकास का कोई मतलब नहीं है।

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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