गया2 घंटे पहलेलेखक: राजीव कुमार

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गया के साथ गयावाल पंडें जुड़े हैं। बिना इनके गया की पहचान नहीं है। वे अपनी उत्पत्ति ब्रह्मा से मानते हैं। गया में श्राद्ध व तर्पण को पूर्णता वे ही प्रदान करते हैं। गयावालों की जिंदगी, उनकी गतिविधि व काम के तरीके हमेशा लोगों के लिए कौतूहल रहा है। आधुनिक मानवशास्त्रीय शोध से पता चला है कि समाज के आर्थिक ढांचे और व्यवहारिक पैटर्न में बदलाव के साथ गयावाल ब्राह्मण अस्तित्व की बड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनके अध्ययन से पता चलता है कि गया के इन ब्राह्मणों का एक अद्वितीय स्थान रहा है, लेकिन रूढ़िवादी ब्राह्मणों से अलग उनकी पहचान रही है। कुछ मायने में उनकी प्रतिष्ठा अधिक मानी जाती है क्योंकि वे मोक्ष के द्वार की ओर ले जाते हैं। वे धर्म और जाति के प्रति अपने दृष्टिकोण में उदार रहने के कारण वे विद्वानों के लिए भारतीय संस्कृति के विकास के जीवंत उदाहरण माने जाते हैं और ब्राह्मणवादी समाज में एक अतुलनीय स्थिति रखते हैं। उनके उपनाम से ही उनकी पहचान है। कुछ ने पर्शियन से, तो कुछ के स्थानीय बोलचाल की भाषा पर उनके व्यवहार के आधार पर उपनाम रखा। हालांकि कुछ गयावाल पंडों के उपनाम श्रद्धालुओं से मिली दान पर रखे गए- सोने के कड़े वाले, हाथी वाले आदि।

| गयावाल पंडों के विभिन्न उपनाम से पता चलता है उनकी चारित्रिक विशेषताएं { टईंया- टईंया का मागधी भाषा में अर्थ होता है युक्ति वाला। गयावाल की वह जमात जिसने मुस्लिम सेना से युक्ति पूर्वक खुद को बचाया, उन गयावालों का उपनाम टईंया पड़ा। { टाटक- भुगतान के लिए गयावाल टट शब्द का इस्तेमाल भुगतान के लिए करते हैं। हालांकि वह गयावाल परिवार, जो विवादों के निपटारे को पंचायत करता है, उन गयावालों का उपनाम टाटक पड़ा। { सिजुआर- यह शब्द श्रीजुआर का अपभ्रंश है। श्री का अर्थ समृद्धि, संपत्ति और जुआर का अर्थ लहर व ज्वार होता है। अर्थात जो लहरों के आधार पर संपत्ति लेता है, उन गयावालों का उपनाम सिजुआर पड़ा। { सेन- जिन गयावालों की रूचि सेना में थी, उसके उत्तराधिकारी बाद में सेन कहलाएं। बारीक-बारीक अर्थात सूक्ष्म व जटिल। गयावाल पंडों का वह समूह, जो अपनी बुद्धिमता से सूक्ष्म व जटिल समस्याओं से पार पाता था, बारीक कहलाएं। { मेहरवार- यह पर्शियन शब्द है, जिसका अर्थ उदार होता है। गयावालों का यह समूह अपने श्रद्धालुओं के प्रति उदारता दिखाते थे। { नकफोफा- गयावालों का यह परिवार अपनी आर्थिक समृद्धि के गौरव को लेकर जाने जाते हैं। नक शब्द को नाग का अपभ्रंश माना गया है। अर्थात नाग की तरह अपनी संपत्ति के गौरव को बचाने वाला। { महतो- यथार्थ रूप से गयावाल गांव के मुखिया को महतो कहा जाता था। इस परिवार के पूर्वज गांव के मुखिया रहे थे, कालांतर में उपनाम महतो पड़ा। { झांगर- पंजाब के ब्राह्मणों की यह उपाधि थी। प्रारंभ में पंजाब के यजमानों की सेवा करने के कारण उपनाम झांगर मिला। { गायब- गुप्त तरीके से जीवनयापन करने वाले परिवार को यह उपनाम मिला था। स्थानीय भाषा में गायब का अर्थ लुप्त होना है। { दीहुआर-डीह का अर्थ गांव है। मुस्लिम आक्रमण के दौरान गांव की रक्षा करनेवाले गयावालों को यह उपनाम मिला। { भैया- मध्य प्रदेश के राजपरिवारों के राजकुमार की उपाधि भैया थी। उनके संरक्षण में रहने वाले गयावालों को यह उपनाम उन्हीं परिवारों से मिला। { धौकड़ेश्वरी- धौकड़ेश्वरी अब धौकड़ी कहलाते हैं। धौकड़ी धर्मशाला को कहते हैं, जहां तीर्थ यात्री का ठहराव होता है। जिन गयावाल परिवारों के धर्मशाला सर्वश्रेष्ठ थे, उन्हें यह उपनाम मिला।

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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