धनंजय सिंह तोमर|छपरा8 मिनट पहले

छपरा के सारण में रेलवे पटरी क्रॉस कर के लोग श्मशान में शवों का अंतिम संस्कार करते हैं। यहां पहुंचने के लिए सड़क तो है, लेकिन वो 3 किलोमीटर दूर है। इसलिए शॉर्टकट के चक्कर में लोग रेलवे पटरी क्रॉस कर शवों का अंतिम संस्कार करते हैं। यहां पहुंचने के लिए रास्ते की मांग को लेकर कई बार आसपास के लोगों ने आवाज भी उठाई, लेकिन हालात जस के तस हैं।

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रिविलगंज प्रखंड में बने सिमरिया मुक्तिधाम घाट पर रोज 70 से 100 शवों का अंतिम संस्कार होता है। छपरा समेत आसपास के जिलों से भी लोग इस मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार करने आते हैं, लेकिन व्यवस्थाएं नहीं होने के चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जान जोखिम में डालकर लोग शव का अंतिम संस्कार करने घाट तक पहुंचते हैं।

इस मुक्तिधाम में रोजाना 70 से 100 शव का अंतिम संस्कार होता है। ये श्मशान घाट बड़े एरिया में है। इसके बावजूद भी यहां पहुंचने का रास्ता सुगम नहीं है। शव को कंधे पर लेकर लोग रेलवे लाइन पार कर घाट पर अंतिम संस्कार करने जाते हैं। बलिया छपरा रेलखंड का दोहरीकरण हो जाने के बाद खतरा और बढ़ गया है। शव लेकर लेकर जाते वक्त लोग के दिल में अपनी जान का डर बना रहता है।

एक दिन में 70 से अधिक शवों का इस घाट पर होता है अंतिम संस्कार।

कई बार ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन

मुक्तिधाम के पहुंचने के रास्ते के लिए स्थानीय स्तर के ग्रामीणों द्वारा कई बार प्रदर्शन किया, लेकिन कोई विशेष सुधार नहीं हो पाया है। सेमरिया श्मशान घाट सारण जिला का सबसे बड़ा श्मशान घाट है। रिविलगंज नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड 1 में आने वाले श्मशान घाट पर आसपास के 60 किलोमीटर दूर के लोग शव का अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंचते हैं।

सिमरिया श्मशान घाट पर 100 से ज्यादा अंतिम संस्कार से जुड़ी सामग्री के दुकान और होटल हैं। जहां हमेशा लोगों का हुजूम लगा रहता है। इस मुक्तिधाम में जिले के कई शहीदों का भी अंतिम संस्कार हुआ है। इसको लेकर प्रशासन से अधिकारी से लेकर राजनेता और जनप्रतिनिधि भी पहुंच चुके हैं।

घाट के आसपास सैकड़ों दुकाने हैं।

घाट के आसपास सैकड़ों दुकाने हैं।

सरकारी मान्यता प्राप्त श्मशान घाट होने के चलते नगर पंचायत द्वारा शव जलाने का शुल्क भी वसूला जाता है। बरसात के दिनों में शव जलाने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शव जलाने के लिए किसी तरह की कोई शेड का व्यवस्था नहीं है। घाट पर समुचित लाइट का भी व्यवस्था नहीं है। इससे रात में शव जलाने में दिक्कत होती है।

घाट से 3.5KM की दूरी पर बनी है सड़क
बिहार सरकार द्वारा विद्युत शवदाह गृह की शुरुआत करने के लिए बात कही गई थी। लेकिन अभी तक कोई शुरुआत तक नहीं हो सकी है। स्थानीय विधायक डॉ. सीएन गुप्ता ने बताया कि रेलवे की मदद से घाट से 3.5 KM की दूरी पर श्री नाथ बाबा ढ़ाला के पास से मुक्ति धाम जाने के लिए सड़क बनाई गई है। जिसका अभी उद्घाटन नहीं हुआ है, लेकिन सड़क चालू है।

लेकिन इस सड़क का कोई उपयोग नहीं करते हैं। शॉर्ट काट के चलते लोग रेलवे ट्रैक के समीप वाले रास्ते से शव पार करके जाते हैं। वहीं लोगों की मांग है कि घाट के पास ही एक फुटवे ओवरब्रिज का निर्माण करा दिया जाए।

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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