भागलपुर5 मिनट पहले

कोशी नदी को बिहार का शोक माना जाता है। ये इन दिनों साबित भी हो रहा है। भागलपुर जिले के कई गांव कोशी में समा रहे हैं। सैकड़ों घर नदी में बह चुके हैं। दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड रिपोर्ट करने जहांगीरपुर पहुंची। हालात बाद से बदतर हैं। हजारों लोगों के घर बह चुके हैं। जिनके बचे हैं वे अपने आशियाने को खुद ही उजाड़ते नजर आए। पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट….

जहांगीरपुर गांव कोशी नदी के किनारे बसा है, जहां करीब 1500 से ज्यादा घर है। गांव में करीब-करीब 4 से 5 हजार लोग रहते है। यहां पिछले 2 महीने से जारी कटाव के कारण 55 पक्के मकान समेत 100 से ज्यादा घर नदी में समा चुके हैं। 100 ऐसे मकान ऐसे है जो कभी भी चपेट में आ सकते हैं। मजबूरन यहां के लोगों को अपने हाथों से अपना घर तोड़ना पर रहा हैं, ताकि कम से कम ईंट बचा सके।

एक हाथ में बच्चा, दूसरे हाथ में टूटते घर की ईंट

कटाव रुकने का नाम नहीं ले रहा है। वहां के लोग अपनी आंखों से अपने बसाए हुए आशियाने को उजड़ते हुए देख रहे हैं। उनका जीवन पिछले 2 महीने से खौफ के साए में कट रहा है। दैनिक भास्कर के कैमरे में ऐसी कई मार्मिक दृश्य कैद हुए जिसे देख कर हर कोई मायूस हो जाए। महिलाएं एक हाथ से अपने बच्चे को गोद में संभाल रहीं थीं तो दूसरे हाथ से टूटते हुए घर के ईंट इकट्ठा कर रही थी। बुजुर्ग महिलाएं ईंट बचाने के लिए अपने सिर पर गमले में उसे सुरक्षित स्थान पर ले जा रही थी।

स्थानीय गुफराना खातून ने बताया कि बच्चे को गोद में संभालते हुए उन्हें ईंट बचना पड़ रहा है।

सत्तू-चूड़ा खाकर कट रही जिंदगी

स्थानीय अब्दुल रकीब ने बताया कि उनका घर आज से 1 महीना 4 दिन पहले नदी के बढ़ते रौद्र रूप का शिकार हो गया। तब से लेकर वहीं आस-पास पन्नी (पॉलिथीन) लगाकर अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। खाने-पीने से लेकर सभी सब चीजों की दिक्कतें शुरू हो गई है। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार सत्तू और चूड़ा खाकर अपने दिन गुजार रहे हैं। कभी-कभी गांव वाले या स्थानीय लोग चंदा काट कर सामूहिक भोजन बनवाते हैं तो उन्हें खाना नसीब होता है।

बाढ़ में घर तो नहीं बच रहा है लेकिन बहने से पहले ही लोग अपने घर तोड़कर कम से कम ईंट बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।

बाढ़ में घर तो नहीं बच रहा है लेकिन बहने से पहले ही लोग अपने घर तोड़कर कम से कम ईंट बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।

सर पर छत नहीं, बारिश ने किया जीना मुश्किल

नदी के चपेट में लोग बेघर हो गए, अब बारिश से दोहरी मार पड़ रही है। मानसूनी बारिश से छुपने के लिए लोग पॉलिथिन का इस्तेमाल कर रहे हैं। मोहम्मद शरीफ ने बताया कि बारिश के कारण रात-रात भर जागना पड़ता है। पूरा परिवार पॉलिथिन के नीचे बैठ कर बारिश से खुद को बचाते हैं। पिछले कई दिनों से वे ऐसे ही रात गुजार रहे हैं।

कटाव इतनी तेज है कि 100 ऐसे मकान ऐसे हैं जो कभी भी चपेट में आ सकते हैं।

कटाव इतनी तेज है कि 100 ऐसे मकान ऐसे हैं जो कभी भी चपेट में आ सकते हैं।

‘बेटी की शादी करेंगे या घर बनाएंगे?’

वहीं रहने वाली अमना खातून ने बताया कि बड़ी मुश्किल से रहने के लिए कुछ दिनों पहले घर बनाया था। मेरी जवान बेटियां है। अब उनकी शादी करूंगी या घर बनाऊंगी। खैर ये तो बाद की बात है लेकिन मैं अपने जवान बेटियों को लेकर कहां जाऊं। मुझे उनकी चिंता सता रही है। खाने-पीने के लिए कुछ नहीं बचा है।

अमना खातून का कहना है कि अब सरकार से मदद की ही आस है।

अमना खातून का कहना है कि अब सरकार से मदद की ही आस है।

डूबते-डूबते बचे बच्चे

कई महिलाओं ने बताया कि बाढ़ की वजह से कई बार उनके बच्चे डूबने से बचे। छोटे-छोटे बच्चे खेलते खेलते पानी के पास चले जाते हैं। कटती जमीन अचानक से अपना आधार छोड़ देती है, जिसके वजह से बच्चे भी पानी में समा जाते है। लेकिन वहां मौजूद कोई न कोई उन बच्चो को बचा लेता है। लेकिन अगर ये घटना किसी के गैर मौजूदगी में हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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