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  • Malnourished Children Increased By 20% In 2 Years Of Corona Period, Anemic Children And Women In Jamui 12% More Than The Figures Of The State

जमुईएक घंटा पहलेलेखक: मुरली दीक्षित

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खाली पड़ा कुपोषण केंद्र।

कुपोषण कलंक मिटाने में अब तक के प्रयास का कुछ खास परिणाम सामने नहीं आया है। कोरोना के बाद जमुई जिले में एनीमिया ग्रसित (रक्तअल्पता) कुपोषित बच्चों की संख्या में सेंसेक्स की तरह उछाल आया है जो राज्य के आंकड़े से भी 12% अधिक है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएचएफएस-5) की रिपोर्ट के अनुसार जमुई जिले में (0-59 माह) के 81.09 % बच्चे एनिमिया ग्रस्त कुपोषित है। जबकि 11 % बच्चे अतिकुपोषित है। रिपोर्ट के मुताबिक अतिकुपोषित 1% बच्चे सर्दी,खांसी से बीमार हैं।

कुपोषित बच्चों का राज्य का आंकड़ा 65.4 %है। कोरोना के पहले वर्ष 2018-2019 में एनएचएफएस-4 की रिपोर्ट में जमुई जिले में 61.3 बच्चे कुपोषित थे। इसी प्रकार एनिमिया ग्रसित कुपोषित महिलाओं (15-49 वर्ष) की संख्या में भी 10% का इजाफा हुआ है। कुपोषित बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी स्वास्थ समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है। बताया जाता है कि कोरोना काल में पिछले दो वर्षों से जिले में राष्ट्रीय एनीमिया उन्मूलन अभियान भी पूरी तरह बंद था।

20 बेड के पोषण पुनर्वास केन्द्र से कुपोषण से जंग जिले में कुपोषण का आंकड़ा निरंतर बढ़ा ही जा रहा है तो दूसरी तरफ कुपोषण मिटाने की जंग महज 20 बेड के पोषण पुनर्वास केन्द्र से लड़ी जा रही है। सदर अस्पताल परिसर में संचालित पोषण पुनर्वास केन्द्र में अतिकुपोषित बच्चों को उसके मां के साथ रखा जाता है । 15 दिनों तक कुपोषित बच्चे का उपचार व उसे पौष्टिक आहार दिया जाता है। इस तरह हर महीने 40 तथा पूरे साल में 480 बच्चों का इलाज के साथ देखभाल पोषण पुनर्वास केन्द्र में किया जाता है। जबकि जिले में (0-59 वर्ष के) बच्चों की संख्या करीब 4 लाख है। भास्कर टीम ने 20 सितम्बर को जब पोषण पुनर्वास केन्द्र को जायजा लिया तो केन्द्र में एक भी बच्चा नहीं था।

आईसीडीएस कार्यक्रम पर सवाल जिले में बच्चे व गर्भवती महिलाओं के उचित पोषण के लिए 1900 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं। अभी पोषण पखबाड़ा भी मनाया जा रहा है, जहां गर्भवती महिलाओं को फल व पौष्टिक आहर देकर गोदभराई की जाती है। हर वर्ष लगभग तीन करोड़ की मोटी रकम आंगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन में खर्च की जाती है। जिला स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट पर नजर डाले तो जिले में 60000 गर्भवती महिलाएं है। वहीं एनएचएफएस-5 की रिपोर्ट के मुताबिक 60% यानि 36 हजार एनिमिया से ग्रसित हैं।

एनएचएफएस-5 की रिपोर्ट एनेमिक बच्चे/ महिला राज्य व जमुई के आंकड़े

06- 59 माह के बच्चे 65.5% 81.9 %

15-49 वर्ष की गर्भवती 63.1% 60.6%

15-49 वर्ष की महिलाएं 63.6 % 76.2%

15- 49 सभी महिलाएं 63.5% 75.2%

52 स्कूलों में हो रही जांच राष्ट्रीय एनीमिया उन्मूलन अभियान के तहत पहले चरण में जिले के 52 स्कूलों को चिह्नित किया गया है। जहां बच्चों की जांच की जा रही है। जांच में सबसे अधिक एनिमिक मिलने वाले बच्चों को 52 दिनों तक आयरन की गोली खिलाई जाएगी।- सुधांशु लाल, डीपीएम, जिला स्वास्थ्य समिति

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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