पटना27 मिनट पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

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31 मई को उच्च माध्यमिक स्कूलों के 6421 पदों पर प्रधानाध्यापक की बहाली के लिए परीक्षा का आयोजन किया था।

31 मई को बिहार लोक सेवा आयोग ने उच्च माध्यमिक स्कूलों के 6421 पदों पर प्रधानाध्यापक की बहाली के लिए परीक्षा का आयोजन किया था। कुल 13055 अभ्यर्थी इस प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल हुए थे। लेकिन इसमें महज 421अभ्यर्थियों को सफलता मिली है जबकि इसमें कुल पद 6421 हैं। इस परिणाम पर सवाल इसलिए उठ रहा है कि आखिर कौन सी वजह रही कि 90 फीसदी से अधिक शिक्षक अभ्यर्थी फेल हो गए और सिर्फ 6.55 फीसदी अभ्यर्थियों को ही सफलता मिल सकी। हद यह कि 87अभ्यर्थियों ने ओएमआर में क्वेश्चन बुकलेट नंबर ही नहीं लिखा, जिस कारण इनका आंसर शीट रद्द कर दिया गया।12547 अभ्यर्था निर्धारित मिनिमम क्वालिफाइंग मार्क्स 48 नंबर भी हासिल नहीं कर पाए।

बीपीएससी ने कहा क्लालिफाइंग मार्क्स निर्धारित थे, उसी अनुसार रिजल्ट दिया गया

प्रधानाध्यापक की वेकेंसी जब निकाली जा रही थी उस समय बिहार विधान मंडल में भी इसको लेकर सवाल उठे थे। कई सदस्यों ने इसमें अनुभव की सीमा को घटाने की भी मांग की थी। लेकिन सरकार ने इसे नहीं घटाया। बता दें कि इसमें150 वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय सवाल पूछे गए थे। सामान्य अध्ययन के 100 सवाल और बीएड कोर्स से संबंधित 50 अंकों की परीक्षा ओएमआर शीट पर ली गई। प्रत्येक प्रश्न पर एक अंक निर्धारित था और हर गलत उत्तर के लिए 0.25 अंक काटे गए। प्रश्न अनुत्तरित रहने पर शून्य अंक दिए गए। परीक्षा की अवधि दो घंटे थी। इस पद पर नियुक्ति के लिए इंटरव्यू नहीं लिया जाना है। बिहार लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक अमरेन्द्र कुमार कहत हैं कि बीपीएससी ने तो इसके लिए क्लाफाइंग मार्क्स निर्धारित कर दिया था। उसी अनुसार परीक्षा परिणाम दिए गए। परीक्षा में माइनस मार्किंग भी थी। भास्कर ने कई शिक्षक संघों से बात की-

अनुभव की बाध्यता की वजह से कई योग्य शिक्षक परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए- अश्वनी पांडेय

टीईटी-एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अश्वनी पांडेय कहते हैं कि यह एक सीमित प्रतियोगिता परीक्षा थी। उसमें भी इसे और अधिक सीमित कर दिया गया क्योंकि आठ और दस वर्षों की अनुभव बाध्यता के कारण बहुत सारे योग्य शिक्षक परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह गए। प्रतियोगिता में BTET/ CTET/ STET पास करके बहाल शिक्षकों को इस परीक्षा से बाहर रखा गया। इसमें सामान्य ज्ञान का सिलेबस साफ-साफ नहीं बताया गया था। पांच विकल्प वाली बात विज्ञापन मे क्लीयर नहीं थी। विस्तृत सिलेबस की तैयारी के लिए शिक्षकों को डेढ महीना का समय भी ठीक से नहीं मिला। शामिल होने वाले शिक्षकों में भी पे-स्केल क्लीयर नहीं होने के कारण तैयारी के प्रति उदासीनता थी। सरकार को चाहिए कि प्रधानाध्यापक / प्रधान शिक्षक परीक्षा में जिन शिक्षकों ने नियुक्ति तिथि से न्यूनतम 5 वर्षों का शिक्षण अनुभव प्राप्त कर लिया है उसे आवेदन का मौका देती। इससे प्रधान शिक्षक की अधिकतम सीटें योग्य अभ्यर्थियों से भर जातीं। विद्यालयों को उत्तम नेतृत्वकर्ता मिल पाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

टीईटी शिक्षकों को मौका मिलता तो सीटें खाली नहीं रहतीं- अमित विक्रम

टीईटी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित विक्रम कहते हैं कि टीईटी पास वाले शिक्षकों को मौका मिलता तो सीटें खाली नहीं रह पातीं। लेकिन इसमें ज्यादातर वैसे ही शिक्षक शामिल हुए थे जो 2003, 2005 और 2008 में बहाल हुए थे। इसमें ज्यादातर वे शिक्षक थे जो मार्क्स के आधार पर नियुक्त हुए थे। 10-12 वर्षों का अनुभव नियोजित शिक्षक कहां से लाते! टीईटी पास शिक्षकों ने तो 2012-13 से ज्वाइन किया है। दूसरी बात यह की प्रश्न भी बीपीएससी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा पीटी के लेवल का था।

42 हजार नवनियुक्त शिक्षकों को भी मौका मिलता तो परिणाम कुछ और होता- राजेन्द्र प्रसाद सिंह

संघर्षशील शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद सिंह कहते हैं कि नियोजित शिक्षक बिहार में 2013-14 से बहाल हो रहे हैं। सरकार ने 42 हजार नवनियुक्त शिक्षकों को इसमें मौका दिया होता तो स्थिति ही कुछ और होती। अभी भी सरकार को यह समझना चाहिए कि जब बीपीएससी प्रतियोगिता परीक्षा ले ही रही है तो उसमें अनुभव की बाध्यता की क्या जरूरत थी? सरकार प्रतियोगिता परीक्षा पास करने वालों को ट्रेनिंग देकर यह काम कर सकती थी। वे यह भी कहते हैं कि बीपीएससी को परीक्षा से जुड़ा सिलेबस पूरी तरह से सामने लाना चाहिए था।

इस परीक्षा में क्या शैक्षणिक योग्यता मांगी गई थी वह जानिए

-भारत का नागरिक हो तथा बिहार राज्य का निवासी हो। – मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उत्तीर्ण हो। अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ अत्यंत पिछड़ा/ पिछड़ा वर्ग/ दिव्यांग/ महिला और आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग के लिए न्यूनतम निर्धारित अंक में 5 प्रतिशत की छूट दी गई। – मान्यता प्राप्त संस्था से बीएड या बीएएड या बी.एसी.एड उत्तीर्ण हो। – वर्ष 2012 या उसके बाद नियुक्त शिक्षक के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा में उत्तीर्ण हो।

यह अनुभव मांगा गया था

– राज्य सरकार के विद्यालय में पंचायती राज संस्था और नगर निकाय संस्था अंतर्गत माध्यमिक शिक्षक के पद पर न्यूनतम 10 वर्ष की लगातार सेवा दी हो। – सीबीएसई या आईसीएसई या बीएसईबी से स्थायी संबद्धता प्राप्त विद्यालय में माध्यमिक शिक्षक के पद पर न्यूनतम 12 वर्ष की लगातार सेवा दी हो। – राज्य सरकार के विद्यालय में पंचायती राज संस्था और नगर निकाय अंतर्गत उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर न्यूनतम 8 वर्ष की लगातार सेवा दी हो। -सीबीएससी या आईसीएससी या बीएसईबी से स्थानीय संबद्धता प्राप्त विद्यालय में उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर न्यूनतम 10 वर्ष की लगातार सेवा दी हो।

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By bihardelegation21

Chandan kumar patel (BA) , I am not social worker I am Social Media Worker.

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